सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मज़दूरों के न्यूनतम वेतन में भारी बढ़ोतरी, जानें कितनी बढ़ेगी सैलरी Labour Minimum Wages Hike 2025

देश के करोड़ों मजदूरों के लिए साल 2025 एक बड़ा बदलाव लेकर आया है। केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों के बाद संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। नई श्रम संहिताओं के लागू होने के बाद पूरे देश के लिए एक राष्ट्रीय फ्लोर वेज तय किया गया है, जिससे मजदूरी में रोजाना करीब ₹95 तक की बढ़ोतरी संभव हुई है। इसका सीधा मतलब है कि एक मजदूर की मासिक आय में लगभग ₹3000 तक का इजाफा हो सकता है। यह नई व्यवस्था 1 अक्टूबर 2025 से लागू हो चुकी है, जिसमें महंगाई भत्ता भी शामिल किया गया है।

न्यूनतम मजदूरी कानून की शुरुआत और बदलाव

भारत में न्यूनतम मजदूरी की व्यवस्था साल 1948 में बने मिनिमम वेजेज एक्ट से शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि मजदूरों को इतना वेतन मिले जिससे वे अपने परिवार की बुनियादी जरूरतें जैसे भोजन, कपड़े, मकान, इलाज और बच्चों की पढ़ाई पूरी कर सकें। समय-समय पर अदालतों ने भी यह साफ किया है कि मजदूरी सम्मानजनक जीवन के लिए पर्याप्त होनी चाहिए। 2025 में लागू की गई नई श्रम संहिताओं ने इस कानून को और मजबूत किया है। अब कोई भी राज्य राष्ट्रीय फ्लोर वेज से कम न्यूनतम मजदूरी तय नहीं कर सकता।

2025 में मजदूरी कितनी बढ़ी

केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 से न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन किया है। महंगाई भत्ता जोड़ने के बाद कई क्षेत्रों में मजदूरी रोजाना ₹95 तक बढ़ गई है। इसका सबसे ज्यादा फायदा असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को मिलेगा, जो देश की बड़ी आबादी का हिस्सा हैं। उदाहरण के तौर पर दिल्ली में अकुशल मजदूरों की मासिक आय पहले जहां करीब ₹17,500 थी, अब बढ़कर ₹18,000 से ज्यादा हो गई है। बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी फ्लोर वेज लागू होने से मजदूरी पहले से बेहतर हुई है। राजस्थान जैसे राज्यों में, जहां मजदूरी काफी कम थी, वहां भी अब सुधार देखने को मिल रहा है।

मजदूरी बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य

इस फैसले का मकसद मजदूरों को महंगाई से राहत देना और उन्हें बेहतर जीवन स्तर देना है। निर्माण, खेती, होटल, घरेलू काम और छोटे उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। मजदूरी बढ़ने से मजदूरों की खरीदने की ताकत बढ़ेगी, बाजार में खर्च बढ़ेगा और इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। नई व्यवस्था में अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल श्रमिकों के हिसाब से वेतन तय किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अहम भूमिका

सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया को कानूनी मजबूती दी है। अदालत ने साफ किया है कि कम मजदूरी देने पर नियोक्ता के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। मजदूर अब सीधे श्रम विभाग में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। वेतन का भुगतान बैंक खाते में करना अनिवार्य कर दिया गया है और नई श्रम संहिताओं के तहत नियुक्ति पत्र, ग्रेच्युटी और अन्य सुविधाएं देना जरूरी होगा। यह फैसला करीब 40 करोड़ असंगठित मजदूरों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

मजदूर अपने अधिकार कैसे जानें और सुरक्षित रखें

नई मजदूरी दरों का पूरा लाभ पाने के लिए मजदूरों को जागरूक रहना जरूरी है। उन्हें अपने राज्य की नई न्यूनतम मजदूरी की जानकारी श्रम विभाग की वेबसाइट से लेनी चाहिए। अगर तय मजदूरी से कम भुगतान हो रहा है तो तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए। काम से जुड़े सभी दस्तावेज संभालकर रखें और किसी भी तरह के शोषण को नजरअंदाज न करें। सरकार का साफ कहना है कि मजदूरों को सिर्फ सही वेतन ही नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण भी मिलना चाहिए।

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